

आज 16 अगस्त को इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की याद में छोटे मियां हाथा के हादी बेगम इमाम बाड़ें से एक अल विदाई अलम जो जुलूस की शक्ल में अपनी पूरी शान शौकत के साथ कर्बला आजम अली खान पर जाकर खत्म हुआ रास्ते में शहर की कई अंजुमनों जैसे पंजतनी
अनवार ए पंजातनी,अंजुमन शमशेर हैदरी ,अंजुमन शब्बीर अंजुमन रिजविया ,अंजुमन जफरिया ,अंजुमन मोइनुल मोमिनीन,अंजुमन मोहम्मदी मोइनुल अजा, अंजुमन शब्बीर या, और अंजुमन हुसैनी ब्रदर्स इत्यादि शामिल रहीं पूरे रास्ते इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और कर्बला के मैदान में जो उनके साथी अंसार दोस्त भाई भतीजे, बेटे भांजे शहीद हुए उनकी शान में अशआर पढ़ते हुए नोहो की शक्ल में सलाम की शक्ल में साथ में मातम करते हुए सीनाज़नि करते हुए आंखों से आंसू बहाते हुए इमाम हुसैन को पुरसा देते हुए पूरे रास्ते उनका जिक्र करते रहे और आखिर में जाकर आजम अली खान में यह जुलूस खत्म हुआ
पूरे रास्ते क्षेत्रीय लोगों ने किनारे खड़े होकर गम जदा आंखों से गमगीन होकर लोगों को सुना सलाम को सुना और पढ़ने वालों को दादो तहसील दी रास्ते में कई जगह पर सबील की शक्ल में पानी और शरबत कभी इंतजाम किया गया था
कई अंजुमनों जिम्मेदारान से बात करने पर पता चला कि जुलूस करीब 100 साल से ऊपर हो गया उठाते हुए और यह अपनी इसी तरह शान ओ शौकत के साथ उठता है बहुत ही सुकून के साथ लोग इसे और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को याद करते हैं और उन्हें पुरसा देते हैं





